बारिश के मौसम में फंगल इन्फेक्शन से बचाव: पहले से तैयारी के आसान तरीके
छोटा जवाब
मानसून आने से पहले अगर कुछ छोटी आदतें अपना ली जाएं, तो फंगल इन्फेक्शन जैसे दाद और खुजली को होने से रोकना इलाज कराने से कहीं आसान हो जाता है.
सबसे ज़रूरी तीन काम ये हैं, त्वचा को हर समय सूखा रखना, ढीले सूती कपड़े पहनना, और तौलिया, जूते व मोज़े को बार बार बदलते रहना ताकि नमी एक ही जगह देर तक न टिके. जिन जगहों पर त्वचा से त्वचा मिलती है, जैसे बगल, जांघ के अंदर और उंगलियों के बीच, वहां यह आदतें सबसे ज़्यादा फर्क डालती हैं. अगर ये तीन आदतें बारिश शुरू होने से पहले ही रूटीन में शामिल कर ली जाएं, तो इन्फेक्शन शुरू होने का मौका ही बहुत कम रह जाता है.
मानसून में खतरा क्यों बढ़ता है, और बचाव इलाज से आसान क्यों है
फंगस को बढ़ने के लिए सिर्फ दो चीज़ें चाहिए होती हैं, नमी और गर्माहट. मानसून के महीनों में दोनों एक साथ मिलती हैं. हवा में नमी का स्तर ऊंचा रहता है, पसीना जल्दी नहीं सूखता, और बारिश में भीगने के बाद कपड़े, जूते और मोज़े घंटों गीले बने रहते हैं.
जो लोग दिन भर बाहर काम करते हैं, जैसे डिलीवरी, खेत या निर्माण का काम करने वाले, उनके कपड़े अक्सर पूरे दिन नम रहते हैं. दफ्तर जाने वाले लोग भी बारिश में भीगकर बंद जूतों में घंटों बैठे रहते हैं, जिससे पैरों के आसपास नमी फंस जाती है. यही वजह है कि मानसून के महीनों में फंगल इन्फेक्शन के मामले बाकी महीनों के मुकाबले काफी बढ़ जाते हैं, और एक बार घर के किसी सदस्य को हो जाए तो यह जल्दी दूसरों तक भी पहुंच सकता है.
एक बार दाद या खुजली शुरू हो जाए, तो उसे ठीक होने में हफ्तों लग सकते हैं, और सही देखभाल के बिना यह बार बार लौट भी सकती है. इसके मुकाबले बचाव के तरीके बहुत सीधे हैं, इनमें कोई खर्च नहीं है, और इन्हें रोज़ की आदत में शामिल करना मुश्किल नहीं. फर्क सिर्फ इरादे का है. ज़्यादातर लोग तब तक कुछ नहीं बदलते जब तक त्वचा पर दाग या खुजली दिखना शुरू न हो जाए, लेकिन मानसून शुरू होते ही, बिना किसी लक्षण के भी, कुछ आदतें अपना लेना इन्फेक्शन को शुरू होने के मौके से ही रोक देता है. यह उन चंद समस्याओं में से एक है जहां तैयारी इलाज से ज़्यादा असरदार और कहीं ज़्यादा आसान है.
इसे अक्सर मुहांसों या तैलीय त्वचा की समस्या समझ लिया जाता है, लेकिन वजह अलग है. मुहांसे और तैलीय त्वचा सीबम यानी त्वचा के अपने तेल के ज़्यादा बनने से जुड़े होते हैं, जिसके बारे में तैलीय त्वचा के लिए घरेलू उपाय में अलग से बताया गया है. वहां दाने छोटे और बिखरे हुए होते हैं, जबकि फंगल इन्फेक्शन शरीर की सिलवटों में एक गोल, साफ आकार का दाग बनाता है जिसके किनारे उभरे हुए होते हैं. त्वचा को मानसून में स्वस्थ और साफ रखने की बाकी आदतें ग्लोइंग स्किन के घरेलू उपाय में विस्तार से बताई गई हैं, जो फंगल इन्फेक्शन से बचाव के साथ भी मिलकर काम करती हैं.
रोज़ाना की ये आदतें इन्फेक्शन को शुरू होने से रोकने में सबसे ज़्यादा मदद करती हैं.
नहाने के बाद अच्छी तरह सुखाएं. सिर्फ शरीर पोंछना काफी नहीं, खास तौर पर बगल, जांघ के अंदर, उंगलियों के बीच और कमर के आसपास की सिलवटों को पूरी तरह सूखा रखें. यहीं नमी सबसे देर तक टिकती है.
ढीले सूती कपड़े चुनें. तंग और सिंथेटिक कपड़े हवा को त्वचा तक पहुंचने नहीं देते. मानसून में खास तौर पर ढीले सूती कपड़े पहनना फर्क डालता है.
गीले कपड़े तुरंत बदलें. बारिश में भीगने के बाद जितनी जल्दी हो सके सूखे कपड़े पहन लें. पसीने से भीगी टी-शर्ट या मोज़े में घंटों बैठे रहना सबसे आम गलती है.
हर रात साफ मोज़े और अंडरगारमेंट पहनें. यह सुनने में छोटी बात लगती है, लेकिन फंगस के बढ़ने के मौके को यह अकेली आदत काफी कम कर देती है.
जूते बदल बदल कर पहनें. एक ही जोड़ी रोज़ पहनने के बजाय दो जोड़ी के बीच बदलते रहें, ताकि हर जोड़ी को अंदर से सूखने का पूरा समय मिले. गीले जूते अगली सुबह फिर पहनना मानसून की सबसे बड़ी गलतियों में से एक है.
तौलिया अलग और बार बार धुला हुआ रखें. घर में हर सदस्य का अपना तौलिया हो, और उसे हफ्ते में दो तीन बार गर्म पानी से धोएं. साझा तौलिया फंगस फैलने का सबसे आसान ज़रिया है.
मोज़े और जूतों को हवादार जगह पर सुखाएं. बंद कमरे या प्लास्टिक बैग में रखे गीले जूते फंगस के लिए एकदम सही माहौल बना देते हैं.
कंघी, नाखून काटने का सामान और चप्पल साझा न करें. ये छोटी चीज़ें भी इन्फेक्शन को एक व्यक्ति से दूसरे तक पहुंचा सकती हैं.
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किन लोगों को सबसे ज़्यादा सावधानी बरतनी चाहिए
जो लोग रोज़ाना बहुत पसीना बहाते हैं, जैसे मज़दूरी करने वाले, खिलाड़ी या जिम जाने वाले लोग, उनमें खतरा सबसे ज़्यादा रहता है. डायबिटीज़ वाले लोगों में फंगल इन्फेक्शन ज़्यादा बार और ज़्यादा गंभीर रूप में हो सकता है, क्योंकि ज़्यादा शुगर वाला माहौल फंगस के बढ़ने में मदद करता है.
स्कूल जाने वाले बच्चे, जो दिन भर बंद जूतों और गीले मोज़ों में रहते हैं, और हॉस्टल या जिम जैसी साझा जगहों पर रहने वाले लोग भी ज़्यादा जोखिम में आते हैं. मोटापे से जूझ रहे लोगों में शरीर की सिलवटें ज़्यादा होती हैं, जहां नमी ज़्यादा देर टिकती है. अगर आप इनमें से किसी भी श्रेणी में आते हैं, तो ऊपर बताई आदतें बाकी लोगों से भी ज़्यादा ध्यान से अपनाना फायदेमंद रहेगा.