बालों में जूं का घरेलू इलाज, जो सच में काम करता है
रात को अचानक सिर में तेज़ खुजली महसूस होना, बच्चे का स्कूल से आकर बार बार सिर खुजलाना, या किसी और के सिर में जूं देखकर अपने बालों को लेकर घबरा जाना, यह अनुभव बहुत सारे घरों में किसी ना किसी समय होता है। जूं होना ना कोई गंभीर बीमारी है और ना किसी बड़ी लापरवाही का नतीजा, लेकिन यह ज़िद्दी होती है और सही तरीके ना अपनाने पर बार बार लौट आती है।
इसके साथ ही तरह तरह की सलाहें भी आती हैं, कोई कहता है मिट्टी का तेल लगाओ, कोई कहता है बाल कटवा दो, तो कोई कहता है सिर्फ एक बार शैम्पू से सब ठीक हो जाएगा। इनमें से कुछ बातें बेकार हैं और कुछ सीधा नुकसान कर सकती हैं। इस guide में हम समझेंगे कि जूं असल में कैसे फैलती है, इसे पहचानने और हटाने का सही तरीका क्या है, दांडरफ से इसका फर्क क्या है, और कब घरेलू उपाय काफी नहीं होते।
जूं और डैंड्रफ में फर्क, पहले यही समझिए
बहुत लोग शुरुआत में इसे डैंड्रफ समझ लेते हैं, और यही सबसे पहली गलती होती है, क्योंकि दोनों के उपाय पूरी तरह अलग हैं।
डैंड्रफ scalp के तेल और एक natural yeast से जुड़ी समस्या है। इसमें छोटे या बड़े रूखे या चिपचिपे flakes scalp से झड़ते हैं और सिर हिलाने, कपड़े बदलने या हाथ से छूने पर आसानी से गिर जाते हैं। इसके बारे में हमारा डैंड्रफ हटाने के उपाय वाला article विस्तार से बताता है कि यह किन वजहों से होता है और इसे कैसे control किया जाता है।
जूं और लीखें इससे बिल्कुल अलग हैं। जूं खुद एक जिंदा कीड़ा है जो scalp पर रेंगता है और खून चूसकर जिंदा रहता है। लीखें उसके अंडे हैं, जो सफेद या पीले रंग के बहुत छोटे दाने जैसी दिखती हैं और बाल की जड़ के बहुत पास, अक्सर कान के पीछे और गर्दन के नीचे के बालों में चिपकी रहती हैं। यही चिपकना इनकी पहचान है, ये डैंड्रफ के flakes की तरह हल्के झटके से नहीं गिरती, बल्कि उंगलियों से खींचने पर भी बाल के साथ अटकी रहती हैं।
अगर खुजली के साथ scalp पर कुछ रेंगता महसूस हो, या बालों में ऐसे सफेद दाने दिखें जो झटकने से ना गिरें, तो यह जूं की तरफ इशारा करता है, ना कि सिर्फ रूखी scalp या डैंड्रफ की तरफ।
जूं फैलती कैसे है, यह गलतफहमी दूर करना ज़रूरी है
जूं को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि यह गंदगी से होती है। असलियत में यह पूरी तरह गलत है। जूं साफ धुले बालों में उतनी ही आराम से रहती है जितना बिना धुले बालों में, क्योंकि उसका खाना scalp का खून है, ना कि गंदगी।
जूं ना उड़ सकती है और ना कूद सकती है। यह सिर्फ रेंग सकती है, इसलिए इसके फैलने का लगभग एकमात्र तरीका है सिर का सिर से सीधा संपर्क। साथ बैठकर सेल्फी लेना, एक साथ खेलना, एक ही तकिए पर सोना, यही सबसे common वजहें हैं, खास तौर पर बच्चों में जो स्कूल और खेलते समय एक दूसरे के बहुत करीब आते हैं।
एक ही कंघी, तौलिया, टोपी, हेलमेट या हेडफोन शेयर करने से भी यह फैल सकती है, हालांकि यह सीधे सिर के संपर्क से थोड़ा कम common तरीका है। घर के पालतू जानवरों से इंसानों में जूं नहीं फैलती, यह पूरी तरह इंसान से इंसान की समस्या है।
इसे समझना क्यों ज़रूरी है, क्योंकि इसी गलतफहमी की वजह से लोग बाल धोने पर बहुत ज़ोर देते हैं जबकि असली ध्यान संपर्क कम करने और सही इलाज पर होना चाहिए।
जूं है या नहीं, पक्का पता कैसे लगाएं
अंदाज़े से इलाज शुरू करने से पहले पक्का पता लगाना बेहतर है, क्योंकि इससे समय और मेहनत दोनों बचती है।
सबसे भरोसेमंद तरीका है गीली कंघी की जांच। बालों को शैम्पू से धोकर हल्का कंडीशनर लगाइए, इससे जूं की हरकत धीमी हो जाती है और वो कंघी में आसानी से फंसते हैं। फिर बारीक दांतों वाली जूं की कंघी से scalp से शुरू करके बालों के छोर तक, हर हिस्से को बांटकर धीरे धीरे कंघी कीजिए। हर बार कंघी करने के बाद कंघी को एक सफेद टिशू या कागज़ पर पोंछ कर देखिए। अगर उस पर हिलते हुए छोटे भूरे या काले कीड़े दिखें, तो जूं की पुष्टि हो गई।
लीखों के लिए सिर की जड़ के पास के बाल, खास तौर पर कान के पीछे और गर्दन के नीचे का हिस्सा ध्यान से देखिए। सफेद या पीले दाने जो बाल पर मजबूती से चिपके हों और उंगलियों से खींचने पर आसानी से ना निकलें, वो लीख हैं।
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जूं हटाने के सही तरीके, कदम दर कदम
अब बात करते हैं उन तरीकों की जो सच में असर करते हैं, बिना scalp को नुकसान पहुंचाए।
गीली कंघी का तरीका (Wet Combing). यह सबसे सुरक्षित और सबसे भरोसेमंद तरीका है, खास तौर पर छोटे बच्चों के लिए। बालों को कंडीशनर से भिगोकर बारीक दांतों वाली जूं की कंघी से पूरे सिर को छोटे छोटे हिस्सों में बांटकर बार बार कंघी कीजिए, हर बार कंघी को टिशू पर पोंछते हुए। इसे हर तीन से चार दिन में एक बार, कम से कम दो हफ्ते तक दोहराना ज़रूरी है, क्योंकि यह अंडों को खुद नहीं मारता, बस निकल चुके जूं को हटाता है।
दवा वाला जूं शैम्पू या लोशन. ये सीधे जूं को मारने के लिए बनाए जाते हैं और असरदार होते हैं, लेकिन इनके साथ आए निर्देशों को बिल्कुल वैसा ही follow करना ज़रूरी है, ना ज़्यादा मात्रा, ना ज़्यादा देर तक लगाना। बहुत छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं या स्तनपान कराने वाली महिलाओं में इस्तेमाल से पहले डॉक्टर या फार्मासिस्ट से सलाह लेना बेहतर है, क्योंकि कुछ product सबके लिए सुरक्षित नहीं होते।
दोहराना, यह सबसे ज़्यादा भूली जाने वाली बात है. किसी भी तरीके से पहली बार में शायद ही सारे अंडे खत्म हों। इसलिए सात से नौ दिन बाद इलाज को दोहराना ज़रूरी है, ताकि इस बीच अंडों से निकले नए जूं भी खत्म हो जाएं। बीच के दिनों में हर दो तीन दिन में गीली कंघी से जांच करते रहना यह पक्का करता है कि नए जूं दिखते ही पकड़ में आ जाएं।
घर की सफाई का हल्का हिस्सा. पिछले दो दिनों में इस्तेमाल हुए तकिए के कवर, चादर और टोपी को गरम पानी से धो लीजिए। जो चीज़ें धोई नहीं जा सकतीं, जैसे कुछ खिलौने या तकिए, उन्हें दो दिन के लिए एक बंद प्लास्टिक बैग में रख दीजिए, इतने समय में जूं बिना खून के जिंदा नहीं रह पाती। पूरे घर को disinfect करने या हर कोने पर keede-maar spray करने की ज़रूरत नहीं है, यह ज़्यादा मेहनत के लिए बहुत कम फायदा देता है।