मसल बनाने की असली नींव, डाइट से शुरू होती है
बहुत से लोग सोचते हैं कि मसल बनाने के लिए सिर्फ जिम में मेहनत काफी है। सच यह है कि जिम में लगाई मेहनत तभी असली नतीजे देती है जब खाने की थाली भी उसका साथ दे। शरीर मसल तभी बनाता है जब उसे पर्याप्त प्रोटीन, थोड़ी एक्स्ट्रा कैलोरी और आराम मिले। इनमें से डाइट सबसे बड़ा हिस्सा है, और अक्सर सबसे कम समझा जाने वाला भी।
इस गाइड में हम आसान भाषा में देखेंगे कि मसल बनाने के लिए डाइट कैसी होनी चाहिए, शाकाहारी और नॉन-वेज दोनों के लिए अलग-अलग प्लान, रोज़ कितना प्रोटीन चाहिए, और भारतीय घर के खाने से इसे कैसे पूरा किया जाए, बिना महंगे सप्लीमेंट के।
ज़रूरी बात: यह गाइड सामान्य सेहतमंद वयस्कों के लिए है। अगर आपको किडनी की कोई समस्या, दिल की बीमारी, कोई पुरानी मेडिकल स्थिति है, या आप गर्भवती हैं, तो अपनी डाइट या एक्सरसाइज रूटीन बदलने से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन से सलाह ज़रूर लें।
मसल बनाने के लिए प्रोटीन इतना ज़रूरी क्यों है
जब आप एक्सरसाइज करते हैं, खासकर वेट ट्रेनिंग या रेज़िस्टेंस वाली एक्सरसाइज, तो मसल फाइबर में बहुत छोटी-छोटी टूट-फूट होती है। शरीर इस टूट-फूट को ठीक करते समय ही मसल को पहले से थोड़ा मज़बूत और बड़ा बना देता है। यह मरम्मत का पूरा काम प्रोटीन के सहारे होता है।
अगर प्रोटीन कम पड़ जाए, तो शरीर के पास मरम्मत के लिए सही कच्चा माल नहीं होता, और आप चाहे कितनी भी मेहनत कर लें, नतीजे धीमे रहते हैं। इसलिए एक्सरसाइज और प्रोटीन दोनों को साथ में सही रखना ज़रूरी है, अकेले कोई एक काफी नहीं है।
एक दिन में कितना प्रोटीन चाहिए
यह सबसे ज़्यादा पूछा जाने वाला सवाल है। मसल बनाने की कोशिश कर रहे किसी इंसान के लिए आम तौर पर हर एक किलो शरीर के वजन पर करीब 1.4 से 2 ग्राम प्रोटीन का लक्ष्य रखा जाता है, जो एक सामान्य गैर-एक्टिव इंसान की ज़रूरत से काफी ज़्यादा है।
इसे आसान बनाते हैं। अगर आपका वजन 60 किलो है, तो रोज़ का टारगेट करीब 85 से 120 ग्राम प्रोटीन बैठता है। 70 किलो वाले के लिए यह करीब 100 से 140 ग्राम हो जाता है। शुरुआत में यह आँकड़ा बड़ा लग सकता है, पर सही खाने की आदत डालते ही यह मुश्किल नहीं रहता।
असली चुनौती एक बार में सारा प्रोटीन खा लेना नहीं, बल्कि इसे दिनभर के तीन-चार मील में बाँटना है। शरीर एक बार में सीमित प्रोटीन ही अच्छी तरह इस्तेमाल कर पाता है, इसलिए नाश्ते, दोपहर, शाम और रात, चारों में थोड़ा-थोड़ा प्रोटीन रखना सबसे असरदार तरीका है।
शाकाहारी मसल बिल्डिंग डाइट प्लान
शाकाहारी लोगों के लिए मसल बनाना पूरी तरह मुमकिन है, बस थोड़ी ज़्यादा प्लानिंग चाहिए। नीचे एक आसान दिनभर का ढाँचा है जिसे आप अपनी पसंद के हिसाब से बदल सकते हैं।
- सुबह का नाश्ता: मूंग दाल चीला या पनीर भुर्जी, साथ में एक गिलास दूध। यह कॉम्बो सुबह ही बीस से पच्चीस ग्राम प्रोटीन दे देता है।
- मिड-मॉर्निंग स्नैक: मुट्ठीभर भुना चना या मूंगफली, या उबले चने। भूख भी शांत, प्रोटीन भी।
- दोपहर का खाना: एक बड़ी कटोरी दाल या राजमा या छोले, साथ में रोटी, चावल और दही। दाल-चावल का कॉम्बिनेशन प्रोटीन की क्वालिटी और बेहतर बना देता है।
- शाम का प्री या पोस्ट-वर्कआउट स्नैक: सोया चंक्स की भुजिया या एक गिलास छाछ के साथ मुट्ठी मेवे।
- रात का खाना: पनीर की सब्ज़ी या सोया की सब्ज़ी, हल्की रोटी और सलाद के साथ।
शाकाहारी थाली में सोया चंक्स, पनीर, दाल, चना और दही को बारी-बारी घुमाते रहना सबसे अच्छा तरीका है, ताकि खाना बोरिंग भी न लगे और प्रोटीन भी पूरा मिले। हमारा शाकाहारी प्रोटीन स्रोत वाला गाइड इसमें और गहराई से मदद करेगा।
नॉन-वेज मसल बिल्डिंग डाइट प्लान
नॉन-वेज खाने वालों के लिए प्रोटीन जुटाना अक्सर थोड़ा आसान लगता है, क्योंकि अंडे, चिकन और मछली में प्रोटीन घना होता है। नीचे एक आसान दिनभर का ढाँचा है।
- सुबह का नाश्ता: दो-तीन पूरे अंडे या अंडा भुर्जी, साथ में एक गिलास दूध या दही।
- मिड-मॉर्निंग स्नैक: उबले अंडे या मुट्ठीभर भुना चना, साथ में एक फल।
- दोपहर का खाना: चिकन या मछली की एक अच्छी सर्विंग, दाल की एक छोटी कटोरी, रोटी और सलाद।
- शाम का प्री या पोस्ट-वर्कआउट स्नैक: उबले अंडे या एक गिलास दूध के साथ मेवे।
- रात का खाना: ग्रिल्ड या भुना हुआ चिकन या मछली, हल्की रोटी या ब्राउन राइस, साथ में सब्ज़ी।
नॉन-वेज खाने वालों को भी दाल, दही और पनीर को थाली से पूरी तरह हटाने की ज़रूरत नहीं। प्रोटीन के अलग-अलग स्रोत मिलाने से पोषण भी बेहतर मिलता है और खाना भी दिलचस्प बना रहता है।
मसल बनाने की डाइट अकेले फॉलो करना मुश्किल लगता है? SuperLiving पर Coach Arjun आपकी बॉडी टाइप, गोल और खाने की पसंद के हिसाब से एक पर्सनल हाई-प्रोटीन प्लान बनाते हैं, चाहे आप शाकाहारी हों या नॉन-वेज। SuperLiving को मुफ्त में शुरू करें और अपने लिए सही प्लान पाएं।
मसल बनाने के लिए प्रोटीन के देसी सोर्स, एक नज़र में
| प्रोटीन सोर्स | टाइप | करीब प्रोटीन (हर 100 ग्राम) | |--------------|------|------------------------------| | चिकन ब्रेस्ट | नॉन-वेज | बहुत ज़्यादा | | अंडा | नॉन-वेज | अच्छा, हर अंडे में करीब छह ग्राम | | मछली | नॉन-वेज | अच्छा से बहुत ज़्यादा, किस्म पर निर्भर | | सोया चंक्स | शाकाहारी | बहुत ज़्यादा, दालों से भी आगे | | पनीर | शाकाहारी | अच्छा प्रोटीन, थोड़ी फैट | | दाल (मूंग, मसूर, अरहर) | शाकाहारी | अच्छा, रोज़ का आसान स्रोत | | राजमा और छोले | शाकाहारी | अच्छा प्रोटीन और फाइबर | | दूध और दही | दोनों | मध्यम, पर रोज़ आसान | | मूंगफली और मेवे | शाकाहारी | अच्छा, साथ में हेल्दी फैट |
डाइट के अलावा, मसल बनाने के लिए और क्या चाहिए
सही एक्सरसाइज
प्रोटीन तभी मसल में बदलता है जब मसल पर सही चुनौती डाली जाए। रेज़िस्टेंस या वेट ट्रेनिंग, चाहे जिम में हो या घर पर बॉडीवेट एक्सरसाइज से, हफ्ते में तीन से चार दिन ज़रूरी है। हमारा घर पर मसल बनाने का तरीका वाला गाइड बिना इक्विपमेंट के शुरुआत करने का पूरा प्लान देता है।
थोड़ी एक्स्ट्रा कैलोरी
मसल बनाने के लिए शरीर को थोड़ी एक्स्ट्रा एनर्जी चाहिए। रोज़ की ज़रूरत से करीब 250 से 400 कैलोरी ज़्यादा खाना, प्रोटीन के साथ मिलाकर, ग्रोथ को सपोर्ट करता है। यह कोई भारी बदलाव नहीं, बस एक-दो एक्स्ट्रा कटोरी दाल या मुट्ठी मेवे जैसा छोटा इज़ाफा काफी है।
पर्याप्त नींद और आराम
मसल असल में जिम में नहीं, आराम के दौरान बनती है। रोज़ सात से आठ घंटे की नींद और वर्कआउट के बीच पूरा एक दिन आराम देना उतना ही ज़रूरी है जितना खाना और एक्सरसाइज। नींद पूरी न हो तो शरीर मसल बनाने की बजाय सिर्फ थकान से लड़ता रह जाता है।
धैर्य और लगातार रहना
मसल बनाना धीमी प्रक्रिया है। पहले हफ्तों में ताकत बढ़ती दिखेगी, पर आईने में साफ बदलाव आने में महीनों लगते हैं। जो लोग टिके रहते हैं, वही असली फर्क देखते हैं।
मसल बनाने की डाइट को लेकर 3 आम गलतफहमियाँ
गलतफहमी 1: "सिर्फ प्रोटीन शेक से मसल बन जाएगी"
सच: शेक सिर्फ एक सुविधा है, कोई जादू नहीं। अगर असली खाने से प्रोटीन पूरा हो रहा है, तो शेक की कोई मजबूरी नहीं है। पहले थाली सुधारें, शेक बाद की बात है।
गलतफहमी 2: "जितना ज़्यादा प्रोटीन उतनी तेज़ मसल"
सच: एक हद के बाद एक्स्ट्रा प्रोटीन का कोई खास फायदा नहीं होता। शरीर एक सीमा तक ही प्रोटीन इस्तेमाल कर पाता है, बाकी सिर्फ एनर्जी की तरह इस्तेमाल हो जाता है।
गलतफहमी 3: "शाकाहारी खाने से मसल धीमी बनती है"
सच: सही प्लानिंग के साथ शाकाहारी थाली भी पूरा प्रोटीन दे सकती है। फर्क सिर्फ थोड़ी ज़्यादा प्लानिंग का है, नतीजों का नहीं।
आगे क्या पढ़ें
मसल बनाने की डाइट अकेले काम नहीं करती, यह सही एक्सरसाइज रूटीन के साथ मिलकर असली नतीजे देती है। अगर आप घर पर बिना इक्विपमेंट के मसल बनाना चाहते हैं, तो हमारा घर पर मसल बनाने का तरीका वाला गाइड शुरुआत के लिए पूरा प्लान देता है। और अगर आप अपनी प्रोटीन थाली को और मज़बूत बनाना चाहते हैं, तो शाकाहारी प्रोटीन स्रोत पर हमारा आर्टिकल ज़रूर देखें।
अगला कदम, एक कोच की मदद लें
मसल बनाने के लिए सही डाइट जान लेना एक बड़ी शुरुआत है, पर हर इंसान की बॉडी, गोल और रूटीन अलग होते हैं। किसी को जल्दी वेट ट्रेनिंग शुरू करनी है, किसी को सिर्फ अपनी थाली में प्रोटीन जोड़ना है, किसी को दोनों में मदद चाहिए। जब आम सलाह आपकी ज़िंदगी पर फिट न बैठे, तब एक असली कोच की ज़रूरत महसूस होती है।
SuperLiving पर Coach Arjun और 20+ coaches आपकी बॉडी टाइप, खाने की पसंद और गोल को समझकर एक पर्सनल मसल बिल्डिंग डाइट और वर्कआउट प्लान बनाते हैं, वो भी पूरी तरह भारतीय खाने और रूटीन पर आधारित। अगर आप लंबे समय तक consistent रहना चाहते हैं, तो एक बार try करके देखें।
यह आर्टिकल सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या, किडनी की स्थिति, दिल की बीमारी या खास डाइट ज़रूरत के लिए डॉक्टर या डाइटिशियन से सलाह लें।