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हार्मोनल इम्बैलेंस के लक्षण और उपाय: कारण, डाइट और कब डॉक्टर से मिलें

SuperLiving Expert Team·

हार्मोनल इम्बैलेंस के लक्षण और उपाय: कारण, डाइट और कब डॉक्टर से मिलें

छोटा जवाब

हार्मोन शरीर के भीतर चलने वाले संदेश हैं, जो नींद, भूख, वजन, मूड, त्वचा, बाल और प्रजनन तंत्र, सबको आपस में जोड़कर चलाते हैं। जब इनमें से किसी का स्तर या समय गड़बड़ाता है, तो असर एक जगह नहीं बल्कि कई जगह एक साथ दिखता है, और यही हार्मोनल इम्बैलेंस की सबसे पहचानने लायक निशानी है। ज़्यादातर मामलों में इसकी जड़ किसी दुर्लभ बीमारी में नहीं, बल्कि चार आम चीज़ों में होती है: लगातार खराब नींद, लंबा तनाव, इंसुलिन से जुड़ी गड़बड़ी और बहुत कम या बहुत असंतुलित खानपान। इन्हें सुधारने से कई लोगों को कुछ महीनों में साफ फर्क मिलता है। लेकिन थायराइड जैसी स्थितियों में जांच और इलाज ज़रूरी है, इसलिए लक्षण लगातार बने रहें तो अंदाज़ा लगाने के बजाय डॉक्टर से मिलना ही सही रास्ता है।

ज़रूरी सूचना: यह लेख सामान्य जानकारी और जीवनशैली से जुड़े सुझावों के लिए है और किसी भी तरह से चिकित्सकीय सलाह, निदान या इलाज का विकल्प नहीं है। हार्मोन से जुड़ी कई स्थितियों की पहचान सिर्फ जांच से होती है, और उनका इलाज हर व्यक्ति में अलग होता है। कृपया किसी भी दवा या सप्लीमेंट को अपने आप शुरू या बंद न करें, और लगातार बने रहने वाले लक्षणों के लिए योग्य डॉक्टर से संपर्क करें।


हार्मोनल इम्बैलेंस होता क्या है

शरीर में कई ग्रंथियां हैं जो खून में बहुत छोटी मात्रा में रसायन छोड़ती हैं। ये रसायन दूर बैठे अंगों तक पहुंचकर उन्हें बताते हैं कि क्या करना है। थायराइड से निकलने वाला हार्मोन तय करता है कि शरीर ऊर्जा कितनी तेज़ी से खर्च करेगा। इंसुलिन तय करता है कि खाने से मिली शुगर कोशिकाओं तक कैसे पहुंचेगी। तनाव वाला हार्मोन तय करता है कि शरीर कब सतर्क रहेगा। और प्रजनन से जुड़े हार्मोन महिलाओं में चक्र और पुरुषों में मांसपेशी, ऊर्जा और मूड को प्रभावित करते हैं।

अहम बात यह है कि ये सब एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। ये अलग अलग स्विच नहीं, बल्कि एक ही ऑर्केस्ट्रा के वाद्य हैं। इसलिए जब एक बिगड़ता है तो अकेला नहीं बिगड़ता। नींद खराब होने पर भूख वाले हार्मोन गड़बड़ाते हैं, उससे मीठे की तलब बढ़ती है, उससे ब्लड शुगर के झटके आते हैं, और वह आगे चलकर वजन और मूड दोनों पर असर डालता है।

इसीलिए हार्मोनल इम्बैलेंस को किसी एक लक्षण से पहचानने की कोशिश गलत रास्ता है। सही सवाल यह है कि क्या कई सिस्टम एक साथ गड़बड़ लग रहे हैं, और क्या यह कई हफ्तों से चल रहा है।


लक्षण जिन पर ध्यान देना चाहिए

सबमें दिखने वाले आम संकेत

  • बिना बड़ी वजह के वजन बढ़ना या घटना, खासकर जब खानपान वैसा ही हो
  • लगातार थकान, जो पूरी नींद के बाद भी बनी रहे
  • नींद का बार बार टूटना या देर तक नींद न आना
  • मूड में तेज़ उतार चढ़ाव, चिड़चिड़ापन या बिना वजह उदासी
  • बालों का ज़्यादा झड़ना या उनका पतला होते जाना
  • त्वचा में बदलाव, जैसे लगातार मुंहासे, बहुत रूखापन या गर्दन के पीछे कालापन
  • मीठे की बार बार तलब और खाने के थोड़ी देर बाद फिर भूख लगना
  • ठंड या गर्मी बर्दाश्त न होना, जो पहले नहीं थी

महिलाओं में खास संकेत

  • पीरियड्स का अनियमित होना, बहुत हल्का होना या महीनों रुक जाना
  • चेहरे, ठोड़ी या पेट पर अनचाहे बाल आना
  • पेट के आसपास वजन का जमा होना जो कम नहीं हो रहा
  • गर्भधारण में कठिनाई
  • पीरियड्स से पहले लक्षणों का बहुत तेज़ हो जाना

पुरुषों में खास संकेत

  • ऊर्जा और सहनशक्ति में लगातार गिरावट
  • मांसपेशियों का घटना, जबकि कसरत वैसी ही हो
  • मन का उदास या उदासीन रहना
  • नींद की गुणवत्ता बिगड़ना और सुबह ताज़गी न महसूस होना

एक बात साफ रखिए। ऊपर की लगभग हर चीज़ किसी और वजह से भी हो सकती है, जैसे खून की कमी, विटामिन की कमी, बहुत ज़्यादा काम, या बस लंबे समय से खराब नींद। इसलिए इस सूची को खुद पर लेबल लगाने के लिए नहीं, बल्कि यह तय करने के लिए इस्तेमाल कीजिए कि डॉक्टर से बात करने का समय आ गया है या नहीं।


सबसे आम कारण

नींद की लगातार कमी। यह सबसे कम आंका जाने वाला कारण है। नींद के दौरान ही शरीर कई हार्मोन का संतुलन दोबारा बनाता है। लगातार छह घंटे से कम सोने पर भूख बढ़ाने वाला हार्मोन ऊपर और पेट भरने का संकेत देने वाला हार्मोन नीचे चला जाता है, और इंसुलिन का काम भी कमज़ोर पड़ता है। नींद और वजन का यह रिश्ता समझने के लिए रात को नींद नहीं आती तो क्या करें पूरा रूटीन देता है।

लंबा चलने वाला तनाव। थोड़े समय का तनाव उपयोगी है, पर महीनों तक बना रहने वाला दबाव तनाव हार्मोन को लगातार ऊंचा रखता है, जो नींद, पाचन, ब्लड शुगर और महिलाओं में चक्र, सब पर असर डालता है।

इंसुलिन से जुड़ी गड़बड़ी। जब खाना ज़्यादातर मैदे, चीनी और तली चीज़ों से बनता है और शारीरिक गतिविधि कम होती है, तो शरीर को उतनी ही शुगर संभालने के लिए ज़्यादा इंसुलिन बनाना पड़ता है। यही स्थिति महिलाओं में पीसीओएस के कई लक्षणों से जुड़ी होती है।

थायराइड की गड़बड़ी। भारत में यह आम है और इसके लक्षण, थकान, वजन में बदलाव, बाल झड़ना, अक्सर दूसरी वजहों के खाते में डाल दिए जाते हैं। इसे सिर्फ जांच से पकड़ा जा सकता है। थायराइड और वजन के रिश्ते पर हमारा विस्तृत गाइड थायराइड में वजन कैसे कम करें पढ़ने लायक है।

बहुत कम खाना या बहुत ज़्यादा कसरत। यह उल्टा लग सकता है, पर शरीर को लंबे समय तक बहुत कम ऊर्जा मिलने पर वह प्रजनन और मेटाबॉलिज़्म से जुड़े कामों को धीमा कर देता है। तेज़ वजन घटाने की कोशिश हार्मोन बिगड़ने का काफी आम कारण है।

जीवन के प्राकृतिक पड़ाव। किशोरावस्था, गर्भावस्था, डिलीवरी के बाद का समय और मेनोपॉज़ के आसपास के साल, इन सबमें हार्मोन स्वाभाविक रूप से बदलते हैं। यह गड़बड़ी नहीं, बदलाव है, हालांकि लक्षण असहज हो सकते हैं।


रोज़ के स्तर पर क्या करें

थाली का ढांचा ठीक कीजिए

किसी एक चमत्कारी चीज़ की तलाश छोड़कर हर मील का ढांचा देखिए। हर बार खाने में प्रोटीन का एक हिस्सा रखिए, जैसे दाल, दही, पनीर, अंडा, चना या सोया, क्योंकि प्रोटीन भूख और ब्लड शुगर दोनों को स्थिर करता है। साथ में फाइबर बढ़ाइए, यानी सब्ज़ियां, सलाद, साबुत अनाज और छिलके वाली दालें, जो शुगर के अवशोषण को धीमा करती हैं।

अच्छी वसा से डरिए मत। मूंगफली, अलसी, अखरोट, बीज और घर का सामान्य तेल सीमित मात्रा में ज़रूरी हैं, क्योंकि कई हार्मोन बनते ही वसा से हैं। बहुत कम वसा वाली डाइट लंबे समय में उल्टा असर करती है।

घटाने वाली चीज़ें सीधी हैं: चीनी वाले पेय, मैदे और तली चीज़ों की रोज़ की खपत, और लंबे समय भूखे रहकर फिर एक बार में बहुत खा लेना। रोज़ की थाली को व्यावहारिक ढंग से सेट करने के लिए वजन घटाने का डाइट चार्ट एक अच्छा शुरुआती ढांचा देता है।

नींद को सबसे पहले सुधारिए

अगर एक ही चीज़ चुननी हो तो यही चुनिए। रोज़ लगभग एक ही समय सोइए और उठिए, दोपहर के बाद चाय और कॉफी घटाइए, सोने से एक घंटा पहले फोन दूर रखिए, और कमरे को अंधेरा और ठंडा रखिए। सात से आठ घंटे की स्थिर नींद कई हार्मोन को अपने आप सही दिशा में खींच लाती है।

रोज़ चलिए और थोड़ी ताकत की कसरत जोड़िए

दिन में तीस मिनट तेज़ चलना इंसुलिन के काम को बेहतर करता है और तनाव हार्मोन को नीचे लाता है। इसके साथ हफ्ते में दो बार हल्की ताकत वाली कसरत, जैसे स्क्वाट, पुशअप या घर पर बॉडीवेट रूटीन, मांसपेशी बनाए रखती है, और मांसपेशी ही वह जगह है जहां शरीर शुगर सबसे कुशलता से इस्तेमाल करता है। ध्यान रखिए कि रोज़ बहुत भारी कसरत उल्टा दबाव बन सकती है, खासकर अगर नींद और खाना पहले से कम हो।

तनाव को व्यावहारिक तरीके से कम कीजिए

तनाव पूरी तरह खत्म नहीं होता, पर उसका शरीर पर पड़ने वाला बोझ घटाया जा सकता है। रोज़ पांच मिनट धीमी सांस का अभ्यास, दिन में एक बार बाहर धूप में चलना, और सोने से पहले दिमाग में चल रही बातें कागज़ पर उतार देना, ये तीनों छोटे लगते हैं पर असर करते हैं। ज़्यादा विस्तार के लिए तनाव कम करने के उपाय देखिए।

धैर्य को भी योजना का हिस्सा बनाइए

यह सबसे ज़रूरी और सबसे अनदेखा हिस्सा है। हार्मोन से जुड़े बदलाव हफ्तों और महीनों में दिखते हैं। तीन महीने एक ही तरीके पर टिके रहना, हर दो हफ्ते नया तरीका आज़माने से कहीं ज़्यादा काम करता है।


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महिलाओं के लिए कुछ खास बातें

महिलाओं में हार्मोनल गड़बड़ी सबसे पहले अक्सर पीरियड्स के ज़रिए बोलती है, क्योंकि चक्र शरीर पर पड़ने वाले दबाव के प्रति बहुत संवेदनशील होता है। चक्र का अनियमित होना, महीनों रुक जाना, चेहरे पर अनचाहे बाल आना या पेट के आसपास वजन जमा होना, ये सब मिलकर एक तस्वीर बनाते हैं जिसकी जांच होनी चाहिए।

पीसीओएस भारत में काफी आम है और इसका इंसुलिन से गहरा रिश्ता है। यही वजह है कि इसमें दवा के साथ साथ खानपान, नींद और गतिविधि का असर काफी बड़ा होता है। शोध में यह लगातार दिखा है कि जिन महिलाओं का वजन ज़्यादा है, उनमें शरीर के वजन का पांच से दस प्रतिशत कम होना भी चक्र में सुधार ला सकता है, जो लोगों की सोच से काफी छोटा बदलाव है। इस पर विस्तार से हमारा गाइड पीसीओएस में वजन कैसे घटाएं पढ़िए।

एक और अहम बात। डिलीवरी के बाद, स्तनपान के दौरान और मेनोपॉज़ के आसपास के सालों में चक्र का बदलना स्वाभाविक है। यहां लक्ष्य पुराने चक्र को ज़बरदस्ती वापस लाना नहीं, बल्कि नींद, प्रोटीन और गतिविधि को संभालकर लक्षणों को आसान बनाना है।


पुरुषों के लिए कुछ खास बातें

पुरुषों में हार्मोन से जुड़ी गड़बड़ी अक्सर चुपचाप आती है। यह किसी साफ लक्षण के बजाय धीरे धीरे ऊर्जा घटने, मांसपेशी कम होने, नींद खराब होने और मन उदास रहने की शक्ल में दिखती है, और इसे ज़्यादातर लोग उम्र या काम का दबाव मान लेते हैं।

यहां तीन चीज़ें सबसे ज़्यादा असर डालती हैं और तीनों आपके हाथ में हैं: पर्याप्त नींद, पेट के आसपास जमी चर्बी कम करना, और हफ्ते में दो से तीन बार ताकत वाली कसरत। साथ में शराब की मात्रा घटाना भी सीधा फर्क डालता है, क्योंकि वह नींद की गुणवत्ता और लिवर, दोनों पर असर करती है। इस दिशा में शुरुआत के लिए स्टैमिना कैसे बढ़ाएं व्यावहारिक कदम देता है।


आम गलतियां

पहली, इंटरनेट पर लक्षण मिलाकर खुद ही निदान कर लेना। थकान और वजन में बदलाव इतने आम हैं कि उनसे किसी नतीजे पर पहुंचना लगभग हमेशा गलत होता है।

दूसरी, बिना सलाह के सप्लीमेंट शुरू कर देना। कई सप्लीमेंट जांच के नतीजों को भी प्रभावित करते हैं और कुछ मौजूदा इलाज से टकराते हैं।

तीसरी, बहुत तेज़ वजन घटाने की कोशिश। बहुत कम कैलोरी वाली डाइट हार्मोन बिगड़ने का इलाज नहीं, अक्सर उसका कारण होती है।

चौथी, नींद को आखिरी प्राथमिकता मानना। डाइट और कसरत पर महीनों मेहनत करते हुए पांच घंटे सोना, आधी मेहनत बेकार कर देता है।

पांचवीं, बहुत जल्दी हार मान लेना। छह हफ्तों में सब कुछ ठीक होने की उम्मीद रखना यहां व्यावहारिक नहीं है।


कब डॉक्टर से मिलना ज़रूरी है

  • वजन बिना किसी साफ वजह के तेज़ी से बढ़ रहा या घट रहा है
  • पीरियड्स तीन महीने या उससे ज़्यादा समय से नहीं आए हैं और गर्भावस्था की संभावना नहीं है
  • बहुत ज़्यादा थकान बनी हुई है और रोज़ के काम मुश्किल लग रहे हैं
  • बाल तेज़ी से झड़ रहे हैं या चेहरे पर अनचाहे बाल तेज़ी से बढ़े हैं
  • गर्दन के आगे सूजन महसूस होती है या आवाज़ में बदलाव आया है
  • बहुत ज़्यादा प्यास, बार बार पेशाब या धुंधला दिखना जैसे लक्षण हैं
  • गर्भधारण में लगातार कठिनाई हो रही है
  • लगातार उदासी या मन का बहुत नीचे रहना बना हुआ है

जांच आमतौर पर सरल होती है और सही समय पर करा लेने से महीनों की उलझन बच जाती है।


मिलाकर बात यह है

हार्मोन शरीर की आपसी बातचीत का तरीका हैं, और उस बातचीत का सबसे बड़ा हिस्सा आपकी रोज़ की आदतें तय करती हैं। ज़्यादातर लोगों के लिए सबसे भरोसेमंद रास्ता किसी विशेष डाइट या महंगे सप्लीमेंट से नहीं, बल्कि चार साधारण चीज़ों से बनता है: स्थिर नींद, हर मील में प्रोटीन और फाइबर, रोज़ थोड़ी गतिविधि के साथ हफ्ते में दो बार ताकत की कसरत, और तनाव पर व्यावहारिक काम। इन्हें तीन महीने ईमानदारी से निभाइए और तब नतीजा आंकिए।

और सबसे ज़रूरी बात, लक्षण अगर लगातार बने हुए हैं तो अंदाज़ा लगाते रहना सबसे महंगा विकल्प है। एक बार जांच करा लेने से यह साफ हो जाता है कि आपका मामला जीवनशैली से सुधरने वाला है या उसे इलाज की ज़रूरत है, और उसके बाद हर कदम कहीं ज़्यादा सटीक हो जाता है।

रोज़ की आदतों को निभाने वाला हिस्सा ही सबसे मुश्किल होता है। SuperLiving पर 20+ कोच हिंदी और हिंग्लिश में आपकी नींद, आपकी थाली और आपकी दिनचर्या के हिसाब से छोटे कदम तय करते हैं, ताकि यह एक और लंबी सूची नहीं बल्कि रोज़ निभाने लायक तरीका बने।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

हार्मोनल इम्बैलेंस के सबसे आम लक्षण क्या हैं? सबसे आम संकेत हैं बिना वजह वजन बढ़ना या घटना, लगातार थकान, नींद का टूटना, मूड में तेज़ उतार चढ़ाव, बालों का झड़ना, त्वचा में बदलाव और मीठे की बार बार तलब। महिलाओं में पीरियड्स का अनियमित होना और पुरुषों में ऊर्जा तथा मांसपेशी में गिरावट खास संकेत हैं। कोई एक लक्षण अकेले सबूत नहीं होता, ध्यान तब देना चाहिए जब तीन चार लक्षण साथ हों और कई हफ्तों से बने हुए हों।

हार्मोनल इम्बैलेंस की जांच कैसे होती है? शुरुआत डॉक्टर से बातचीत और लक्षणों के इतिहास से होती है, फिर ज़रूरत के हिसाब से खून की कुछ जांचें, जैसे थायराइड, ब्लड शुगर, विटामिन डी और महिलाओं में चक्र के किसी खास दिन पर कुछ हार्मोन का स्तर। कभी अल्ट्रासाउंड भी किया जाता है। खुद से लंबी टेस्ट सूची करवा लेना अक्सर भ्रम बढ़ाता है, क्योंकि कई हार्मोन दिन और चक्र के हिसाब से बदलते हैं।

क्या यह डाइट और लाइफस्टाइल से ठीक हो सकता है? यह जड़ पर निर्भर करता है। नींद, तनाव, इंसुलिन और बहुत कम खाने से पैदा हुआ असंतुलन जीवनशैली सुधारने पर कुछ महीनों में बेहतर होता है। लेकिन थायराइड जैसी मेडिकल स्थितियों में जीवनशैली इलाज का साथ देती है, उसकी जगह नहीं लेती। इसीलिए जांच करा लेना पहला व्यावहारिक कदम है।

हार्मोन ठीक होने में कितना समय लगता है? आमतौर पर उम्मीद से ज़्यादा। नींद और इंसुलिन से जुड़े सुधार चार से आठ हफ्तों में महसूस होने लगते हैं, जबकि महिलाओं में चक्र से जुड़े बदलाव अक्सर तीन महीने लेते हैं। किसी भी तरीके को कम से कम तीन महीने का ईमानदार मौका दीजिए।

क्या तनाव से सच में हार्मोन बिगड़ते हैं? हां, और यह सबसे कम आंका जाने वाला कारण है। लगातार तनाव में तनाव हार्मोन ऊंचा बना रहता है, जो नींद, भूख, ब्लड शुगर और महिलाओं में चक्र, सब पर असर डालता है। नींद का समय स्थिर करना, रोज़ थोड़ा चलना और अवास्तविक डाइट नियम हटाना, इन तीनों से शरीर पर दबाव काफी घटता है।

हार्मोनल इम्बैलेंस में क्या खाना चाहिए? हर मील में प्रोटीन रखिए, जैसे दाल, दही, पनीर, अंडा या चना, और फाइबर बढ़ाइए। मूंगफली, अलसी और अखरोट जैसी अच्छी वसा सीमित मात्रा में ज़रूरी है क्योंकि कई हार्मोन वसा से बनते हैं। चीनी वाले पेय, मैदे और तली चीज़ों की रोज़ की खपत घटाइए, और लंबे समय भूखा रहकर एक बार में बहुत खाने से बचिए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

हार्मोनल इम्बैलेंस के सबसे आम लक्षण क्या हैं?+

सबसे आम संकेत हैं बिना वजह वजन बढ़ना या घटना, लगातार थकान जो सोने के बाद भी न जाए, नींद का बार बार टूटना, मूड में तेज़ उतार चढ़ाव, त्वचा पर मुंहासे या बालों का ज़्यादा झड़ना, बहुत ज़्यादा भूख या मीठे की तलब, और महिलाओं में पीरियड्स का अनियमित हो जाना या चेहरे पर अनचाहे बाल आना। पुरुषों में यह अक्सर ऊर्जा में कमी, मांसपेशियों का घटना और मन का उदास रहना बनकर दिखता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि इनमें से कोई एक लक्षण अकेले किसी गड़बड़ी का सबूत नहीं है, क्योंकि थकान और वजन में बदलाव के दर्जनों कारण होते हैं। असली संकेत तब बनता है जब तीन चार लक्षण साथ में हों और कई हफ्तों से बने हुए हों।

हार्मोनल इम्बैलेंस की जांच कैसे होती है?+

जांच आमतौर पर सीधी होती है और उसकी शुरुआत डॉक्टर से बातचीत और आपके लक्षणों के इतिहास से होती है। इसके बाद लक्षणों के हिसाब से खून की कुछ जांचें करवाई जाती हैं, जैसे थायराइड की जांच, ब्लड शुगर और इंसुलिन से जुड़े टेस्ट, विटामिन डी, और महिलाओं में पीरियड्स के चक्र के किसी खास दिन पर कुछ हार्मोन का स्तर। ज़रूरत पड़ने पर अल्ट्रासाउंड भी किया जाता है। खुद से इंटरनेट देखकर टेस्ट की लंबी सूची करवा लेना अक्सर उलझन बढ़ाता है, क्योंकि कई हार्मोन दिन के समय और चक्र के दिन के हिसाब से बदलते हैं और गलत समय पर की गई जांच भ्रम पैदा करती है। सही क्रम है, पहले डॉक्टर से बात, फिर जांच।

क्या हार्मोनल इम्बैलेंस डाइट और लाइफस्टाइल से ठीक हो सकता है?+

यह पूरी तरह इस पर निर्भर करता है कि गड़बड़ी की जड़ क्या है। जब असंतुलन की वजह लंबे समय की खराब नींद, बहुत ज़्यादा तनाव, बहुत तेज़ वजन घटाने की कोशिश, अत्यधिक कसरत या इंसुलिन से जुड़ी दिक्कत है, तो डाइट, नींद और गतिविधि को ठीक करने से कुछ महीनों में साफ सुधार दिखता है। लेकिन जब जड़ में कोई मेडिकल स्थिति है, जैसे थायराइड की गड़बड़ी या कोई ग्रंथि से जुड़ी समस्या, तो जीवनशैली इलाज का साथ देती है, उसकी जगह नहीं ले सकती। इसीलिए अंदाज़ा लगाना सबसे कमज़ोर कदम है। एक बार जांच करा लेने से पता चल जाता है कि आप किस स्थिति में हैं।

हार्मोन ठीक होने में कितना समय लगता है?+

आमतौर पर लोगों की उम्मीद से ज़्यादा। शरीर के ज़्यादातर हार्मोन चक्र हफ्तों और महीनों में चलते हैं, दिनों में नहीं। महिलाओं में पीरियड्स के चक्र से जुड़े बदलाव दिखने में अक्सर तीन महीने लगते हैं, क्योंकि आज किए गए बदलाव का असर दो तीन चक्र बाद सामने आता है। इंसुलिन और नींद से जुड़े सुधार थोड़े जल्दी, लगभग चार से आठ हफ्तों में महसूस होने लगते हैं। व्यावहारिक मतलब यह है कि किसी भी बदलाव को कम से कम तीन महीने का ईमानदार मौका दीजिए और हर दो हफ्ते में तरीका मत बदलिए, वरना यह पता ही नहीं चलेगा कि असल में किस चीज़ से फायदा हुआ।

क्या तनाव से सच में हार्मोन बिगड़ते हैं?+

हां, और यह सबसे कम आंका जाने वाला कारण है। लगातार तनाव में शरीर का तनाव वाला हार्मोन ऊंचा बना रहता है, और वह नींद, भूख, ब्लड शुगर और महिलाओं में पीरियड्स के चक्र, सब पर असर डालता है। यही वजह है कि परीक्षा, नौकरी का दबाव, नींद की कमी या किसी बड़े निजी बदलाव के बाद बहुत से लोगों का चक्र गड़बड़ा जाता है या वजन अचानक बढ़ने लगता है। इसका मतलब यह नहीं कि तनाव पूरी तरह खत्म करना पड़ेगा, जो किसी के लिए मुमकिन नहीं है। लेकिन नींद का समय स्थिर करना, रोज़ थोड़ा चलना और खुद पर लगाए गए अवास्तविक डाइट नियमों को हटाना, इन तीनों से शरीर पर पड़ा दबाव काफी कम होता है।

हार्मोनल इम्बैलेंस में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं?+

किसी जादुई भोजन की तलाश करने से बेहतर है थाली का ढांचा ठीक करना। हर मील में प्रोटीन रखिए, जैसे दाल, दही, पनीर, अंडा, सोया या चना, क्योंकि प्रोटीन भूख और ब्लड शुगर दोनों को स्थिर करता है। फाइबर बढ़ाइए, यानी सब्ज़ियां, साबुत अनाज और छिलके वाली दालें। अच्छी वसा जैसे मूंगफली, अलसी, अखरोट और घर का सामान्य तेल सीमित मात्रा में रखिए, क्योंकि कई हार्मोन बनते ही वसा से हैं और बहुत कम वसा वाली डाइट उल्टा असर करती है। घटाने वाली चीज़ें हैं चीनी वाले पेय, मैदे और तली चीज़ों की बार बार खपत, और लंबे समय तक भूखा रहकर फिर एक साथ बहुत खा लेना। यह भी याद रखिए कि बहुत कम कैलोरी वाली डाइट खुद हार्मोन बिगाड़ने का एक आम कारण है।

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